केंद्रीय आयुर्वेद अनुसन्धान संस्थान में 8वें राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत विविध गतिविधियों का सफल आयोजन।
8वें राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026 के अवसर पर संस्थान द्वारा मातृ एवं शिशु पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न गतिविधियों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन दिनांक 10 अप्रैल 2026 को डॉ. हेमंत पाणिग्रही, सहायक निदेशक (प्रभारी) द्वारा किया गया। इसके पश्चात आयोजित विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमे जीवन के प्रथम छह वर्षों में मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना, खेल-खेल में शिक्षा, बच्चों में स्क्रीन टाइम कम करने में अभिभावकों एवं समुदाय की भूमिका, मस्तिष्क विकास हेतु प्रारंभिक उत्तेजना (0–3 वर्ष) एवं मातृ एवं शिशु पोषण विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए प्रारंभिक बाल्यावस्था में पोषण एवं उत्तेजना के महत्व पर प्रकाश डाला गया|
दिनांक 22 अप्रैल 2026 को बालरोग ओपीडी में वृद्धि निगरानी एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन डॉ. एच. पाणिग्रही, संस्थान प्रभारी द्वारा किया गया। उन्होंने लाभार्थियों से संवाद कर अभिभावकों को बच्चों के लिए संतुलित आहार अपनाने हेतु प्रेरित किया।
शिविर के दौरान—डॉ. साक्षी शर्मा ने पोषण पखवाड़ा के उद्देश्यों एवं पोषण सुधार में सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. रेनू रानी, शोध अधिकारी (आयु.) द्वारा कुल 41 बच्चों की वृद्धि एवं स्वास्थ्य की जांच की गई तथा अभिभावकों को आवश्यक परामर्श प्रदान किया गया।
पोषण को बढ़ावा देने हेतु लाभार्थियों एवं आईपीडी रोगियों को केला एवं मिष्ठी दोई वितरित किए गए। साथ ही, अभिभावकों को पोषण पखवाड़ा के संदेशों से अवगत कराने हेतु आईईसी (IEC) सामग्री का भी वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त, संस्थान द्वारा एक बहु-केन्द्रित अध्ययन “भारत के विभिन्न राज्यों में आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थानों में आने वाले लाभार्थियों के मध्य मातृ एवं शिशु पोषण संबंधी ज्ञान, दृष्टिकोण एवं व्यवहार (KAP) का आकलन” भी संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पोषण संबंधी जागरूकता एवं व्यवहार की स्थिति का मूल्यांकन करना है। उक्त समस्त कार्यक्रमों का समन्वयन डॉ. साक्षी शर्मा, डॉ. शैज़ी लईक एवं डॉ. रेनू रानी द्वारा किया गया। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य समुदाय में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, स्वस्थ आदतों को प्रोत्साहित करना तथा बच्चों के समुचित विकास एवं बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करना है।





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